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SRINAGAR: According to Executive Officer, State Haj Committee intending Haj Pilgrims of Kashmir Division are informed to collect their Cover Number slips from 1st January, 2018 to 6th January, 2018 from the offices of respective Deputy Commissioners. However, the Pilgrims of district Srinagar can obtain the same from Haj House, Bemina Srinagar. The Cover Number slips shall be issued against the production of Haj Application Form receipt. Further, all such intending Pilgrims are requested to check the entries made in the Cover Slip thoroughly and in case of any error or omission the same must be brought to the notice of the Computer Cell of State Haj Committee either in person or telephonically (96224583320194-2495367) during office hours.

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  • Dorjay asks youth to follow path of righteousness

 

JAMMU: Minister for Ladakh Affairs and Cooperatives, Chering Dorjay today participated in Losar celebration organized by All Ladakh Students Association Jammu (ALSAJ) here. Speaking on the occasion, the Minister stressed upon the students to take a resolve on this Losar to follow the path of righteousness as shown by the teachings of 19th Skushok Bakula. He asked the  Ladakhi community to strive for achieving quality education and serve the society by working for peace, love, compassion which is fundamental to celebration of Losar.

 

Dorjey said in Ladakh Losar is regarded as the most important socio - religious event. “The festivities form an amalgamation of ancient rituals, folk dance, music and other performing arts”, he added. He further said “Losar is marked by ancient ceremonies that represent the struggle between good and evil, symbolizes throwing away of the evil and marks bidding farewell to the old year and welcoming the new one” he maintained.

 

Highlighting the rich heritage and diversity of Ladakh, the home to people of different religions, the Minister said “We represent a particular culture, language and nature so we should strengthen the diversity which helps in flourishing the region.”  Applauding the role and achievements of ALSAJ, the Minister said celebrating the culture away from home was a valued step taken by them.

 

He also hailed the establishment of blood donors group by the Association to help the ailing people of Ladakh going for medical treatment to other States of the country including Chandigarh PGI and Delhi.  The Minister also appreciated the participants of the cultural programmed presented on the occasion featuring   folk dance and music of Ladakh.  Former Chief Secretary, C Phuntsog, civil society members and a large number of students were present on the occasion.

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प्रिय पाठकों/मित्रों, वर्तमान में राजनीति एक ऐसा क्षेत्र बनता जा रहा है, जहाँ कम परिश्रम में भरपूर पैसा व प्रसिद्ध‍ि दोनों ही प्राप्त होते हैं। ढेरों सुख-सुविधाएँ अलग से मिलती ही है। और मजा ये कि इसमें प्रवेश के लिए किसी विशेष शैक्षणिक योग्यता की भी जरूरत नहीं होती। नीति कारक ग्रह राहु, सत्ता का कारक सूर्य, न्याय-प्रिय ग्रह गुरु, जनता का हितैषी शनि और नेतृत्व का कारक मंगल जब राज्य-सत्ता के कारक दशम भाव, दशम से दशम सप्तम भाव, जनता की सेवा के छठे भाव, लाभ एवं भाग्य स्थान से शुभ संबंध बनाए तो व्यक्ति सफल राजनीतिज्ञ बनता है। राजनीती एक बहुत ही महत्वपूर्ण क्षेत्र है । और आज भारत की राजनीति अर्थात वैकुण्ठ की प्राप्ति के सामान है । राजनीती में सफलता के लिए मुख्य रूप से सूर्य, मंगल, गुरु, शनि और राहु कारक होते है ।।
 
व्यक्ति सफल राजनीतिज्ञ बनेगा या नहीं ? इसका बहुत कुछ उसके जन्मकालिक ग्रहों की स्थिति पर निर्भर करता है। अन्य व्यवसायों एवं करियर की भांति ही राजनीति में प्रवेश करने वालों की कुंडली में भी ज्योतिषीय योग होते हैं। कुंडली का दशम भाव राजनीती, सत्ता, अधिकार, सरकार से सम्बंधित भाव है ।।
 
ज्योतिषाचार्य पंडित दयानन्द शास्त्री ने बताया की वैसे भी राजनीति दो शब्दों राज-नीति के योग से बना हुआ एक शब्द है जिसका सामान्य अर्थ है एक ऐसा राजा जिसकी नीतियां और राजनैतिक गतिविधियां इतनी परिपक्व और सुदृढ़ हों, जिसके आधार पर वह अपनी जनता का प्रिय शासक बन सके और अपने कार्यक्षेत्र में सम्मान और प्रतिष्ठा अर्जित करता हुआ उन्नति के चर्मात्कर्ष तक पहुंचे। राजनीति में पूर्णतया सफल केवल वही जातक हो सकता है जिसकी कुंडली में कुछ विशिष्ट धन योग, राजयोग एवं कुछ अति विशिष्ट ग्रह योग उपस्थित हों, क्योंकि एक सफल राजनेता को अधिकार, मान-सम्मान सफलता, रुतबा, धन शक्ति, ऐश्वर्य इत्यादि सभी कुछ अनायास ही प्राप्त हो जाते हैं। अतः एक सफल राजनेता की कुंडली में विशिष्ट ग्रह योगों का पूर्ण बली होना अति आवश्यक है क्योंकि कोई भी व्यक्ति किसी भी क्षेत्र में तभी सफल होगा जब कुंडली में उपस्थित ग्रह योग उसका पूर्ण समर्थन करेंगे। 
 
चौथा भाव जनता से सम्बंधित भाव है तो पाचवां घर जातक की बुद्धि विवेक का है । दूसरा भाव वाणी का है राजनीति में भाषण देने की कला का अच्छा होने के लिए द्वितीय भाव अच्छा होना चाहिए ।।
 
बुध ग्रह बुद्धि, सोच-समझ और बोलने की शक्ति का कारक है । बुद्धि, सोच-समझकर बोलना जैसे क्या और कैसे बोलना चाहिए यह कला बुध ही देता है ।।
 
ज्योतिषाचार्य पंडित दयानन्द शास्त्री ने बताया की  इन सभी ग्रहों और भावों का अनुकूल और मजबूत होना ही जातक को एक सफल राजनीतिज्ञ बनाता है । राजनीति एक बहुत ही बड़ा और उच्च अधिकारों और जनता के सहयोग का क्षेत्र होता है ।।जिसके लिये जरुरी है कुंडली में राजयोगो का होना । जितने ज्यादा केंद्र त्रिकोण के सम्बन्ध आपस में बनते है, कुण्डली में राजयोग उतना ही ज्यादा शक्तिशाली होता है ।।राजनीति में जाने के लिए भी कुंडली में कुछ विशेष ग्रहों का प्रबल होना जरूरी है। राहु को राजनीति का ग्रह माना जाता है। यदि इसका दशम भाव से संबंध हो या यह स्वयं दशम में हो तो व्यक्ति धूर्त राजनीति करता है। अनेक तिकड़मों और विवादों में फँसकर भी अपना वर्चस्व कायम रखता है। राहु यदि उच्च का होकर लग्न से संबंध रखता हो तब भी व्यक्ति चालाक होता है। 
 
राजनीति के लिए दूसरा ग्रह है गुरु- गुरु यदि उच्च का होकर दशम से संबंध करें, या दशम को देखें तो व्यक्ति बुद्धि के बल पर अपना स्थान बनाता है। ये व्यक्ति जन साधारण के मन में अपना स्थान बनाते हैं। चालाकी की नहीं वरन् तर्कशील, सत्य प्रधान राजनीति करते हैं। 
 
राजयोग के प्रभाव से जातक समाज में सम्मान का जीवन जीता है । जो जातक राजनीती में होते है, उनकी कुंडली में राजयोग होता ही है । इसी के प्रभाव से यह समाज में अपनी पहचान और उच्च स्तर का जीवन जीते है ।। सूर्य ग्रहों का राजा है, मंगल सेनापति, गुरु मंत्री एवं सर्वोत्कृष्ट सलाहकार, शनि जनता का कारक है तो राहु चलाकी, गुप्त षड्यंत्र और आज की वर्तमान राजनीति का बहुत ही महत्वपूर्ण कारक ग्रह है ।।
 
सूर्य राजा, सफलता, सरकार का कारक होने से राजनीति में उच्च अधिकार और सफलता दिलाता है । मंगल बल और साहस का कारक है, यह जातक को हिम्मत देने का काम करता है ।।गुरु सही रास्ता दिखाने वाला है तो इसके इसी गुण के कारण राजनीती में सफल होने वाले जातक मंत्री आदि जैसे पद को प्राप्त करते है ।।शनि की अनुकूल स्थिति जातक को जनता से सहयोग दिलाती है । शनि के अनुकूल होने से राजनीती में जातक लोकप्रियता प्राप्त करता है ।।
 
इसके अलावा दशम भाव या दशम भाव से बना गजकेसरी योग । दशम भाव में बैठा शुभ और बली राहु या शनि इन सभी का किसी अन्य योगकारक ग्रहों से सम्बन्ध होना राजनीति में सफलता के लिए शुभ होता है ।जन्म कुण्डली के दशम घर को राजनीति का घर कहते हैं। सत्ता में भाग लेने के लिए दषमेष और दशम भाव का मजबूत स्थिति में होना जरूरी है। दशम भाव में उच्च, मूल त्रिकोण या स्वराषिस्थ ग्रह के बैठने से व्यक्ति को राजनीति के क्षेत्र में बल मिलता है। गुरु नवम भाव में शुभ प्रभाव में स्थित हो और दषम घर या दश्मे ष का संबंध सप्तम भाव से हो तो व्यक्ति राजनीति में सफलता प्राप्त करता है। सूर्य राज्य का कारक ग्रह है अतः यह दशम भाव में स्वराशि या उच्च राशि में होकर स्थित हो और राहु छठे, दसवें व ग्यारहवें भाव से संबंध बनाए तो राजनीति में सफलता की प्रबल संभावना बनती है। इस योग में वाणी के कारक (द्वितीय भाव के स्वामी) ग्रह का प्रभाव आने से व्यक्ति अच्छा वक्ता बनता है। 
 
ज्योतिषाचार्य पंडित दयानन्द शास्त्री के अनुसार किसी भी जातक की लग्न कुण्डली में यह देखा जाता है कि दशम भाव अथवा दशम भाव के स्वामी ग्रह का सप्तम से सम्बंध होने पर जातक सफल राजनेता बनता है। क्योंकि सांतवा घर दशम से दशम है इसलिये इसे विशेष रुप से देखा जाता है साथ ही यह भाव राजनैतिक पद दिलाने में सहायक माना गया है। छठवा घर नौकरी या सेवा का घर होता है यदि इस घर का संबंध दशम भाव या दशमेश से होता है तो व्यक्ति जनता की सेवा करते हुए बडा नेता बनता है या नेता बन कर जनता की सेवा करता है। अब यही संकेत वर्ग कुण्डलियां भी दे रहीं हों तो समझों कि व्यक्ति राजनेता जरूर बनेगा। इसमें नवांश और दशमांश नामक वर्ग कुण्डलियां मुख्य रूप से विचारणीय होती हैं। यदि जन्म कुण्डली के राजयोगों के सहायक ग्रहों की स्थिति नवाशं कुण्डली में भी अच्छी हो तो परिणाम की पुष्टि हो जाती है। वहीं दशमाशं कुण्डली को सूक्ष्म अध्ययन के लिये देखा जाता है। यदि लग्न, नवांश और दशमाशं तीनों कुण्डलियों में समान या अच्छे योग हों तो व्यक्ति बड़ी राजनीतिक उंचाइयां छूता है।
 
सूर्य, चन्द्र, बुध व गुरु धन भाव में हों व छठे भाव में मंगल, ग्यारहवें घर में शनि, बारहवें घर में राहु व छठे घर में केतु हो तो एसे व्यक्ति को राजनीति विरासत में मिलती है। यह योग व्यक्ति को लम्बे समय तक शासन में रखता है। जिसके दौरान उसे लोकप्रियता व वैभव की प्राप्ति होती है। वहीं वृषश्चिक लग्न की कुण्डली में लग्नेश बारहवे में गुरु से दृ्ष्ट हो शनि लाभ भाव में हो, राहु -चन्द्र चौथे घर में हो, स्वराशि का शुक्र सप्तम में लग्नेश से दृ्ष्ट हो तथा सूर्य ग्यारहवे घर के स्वामी के साथ युति कर शुभ स्थान में हो और साथ ही गुरु की दशम व दूसरे घर पर दृष्टि हो तो व्यक्ति प्रखर व तेज नेता बनता है। सारांश यह कि कर्क, सिंह और वृश्चिक लग्न या चंद्र राशि होने पर राजनीतिक सफलता मिलने की सम्भावनाएं मजबूत होती हैं।
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जानिए कैसे राजनीती में राहु की भूमिका होती है विशेष--
 
ज्योतिषाचार्य पंडित दयानन्द शास्त्री ने बताया की राजनीति में राहु का महत्वपूर्ण स्थान है। राहू को सभी ग्रहों में नीतिकारक ग्रह का दर्जा दिया गया है। इसका प्रभाव राजनीति के घर से होना चाहिए। राहु के शुभ प्रभाव से ही नीतियों के निर्माण व उन्हें लागू करने की क्षमता व्यक्ति विशेष में आती है। राजनीति के घर (दशम भाव) से राहु का संबंध बने तो राजनेता में स्थिति के अनुसार बात करने की योग्यता आती है। तीसरे, छठे भाव में स्तिथ उच्च का या मूल त्रिकोर का राहू भी बड़े राजनैतिक योग में सहायक है।राहु आज की राजनीति का हीरो है, कारण कि आज वर्तमान राजनीति में सफल होने के लिए राहु का अनुकूल और शुभ होना बहुत जरुरी है । यदि राहू अनुकूल परिणाम न दे तो जातक राजनीती में एक बार नहीं कई बार असफल हो जाता है । 
 
सफल राजनेताओं की कुंडली में राहु का संबंध छठे, सातवें, दसवे व ग्यारहवें भाव से देखा गया है। छठे भाव को सेवा का भाव कहते हैं। व्यक्ति में सेवा भाव होने के लिए इस भाव से दशम या दशमेश का संबंध होना चाहिए। सातवां भाव दशम से दशम है इसलिए इसे विशेष रूप से देखा जाता है।
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राजनैतिक सफलता के कुछ विशेष आवश्यक योग –
 
किसी भी जन्म कुंडली के दसवें घर को राजनीति का घर कहते हैं। सत्ता में भाग लेने के लिए दशमेश और दशम भाव का मजबूत स्थिति में होना आवश्यक है। दशम भाव में उच्च, मूल त्रिकोण या स्वराशिस्थ ग्रह के बैठने से व्यक्ति को राजनीति के क्षेत्र में बल मिलता है। गुरु नवम भाव में शुभ प्रभाव में स्थित हो और दशम घर या दशमेश का संबंध सप्तम भाव से हो तो व्यक्ति राजनीति में सफलता प्राप्त करता है। सूर्य राज्य का कारक ग्रह है अत: यह दशम भाव में स्वराशि या उच्च राशि में होकर स्थित हो और राहू छठे, दशवें व ग्यारहवें भाव से संबंध बनाए तो राजनीति में सफलता की प्रबल संभावना बनती है। इस योग में वाणी के कारक (द्वितीय भाव के स्वामी) ग्रह का प्रभाव आने से व्यक्ति अच्छा वक्ता बनता है।
 
ज्योतिषाचार्य पंडित दयानन्द शास्त्री ने बताया की जब शनि दशम भाव में हो या दशमेश से संबंध बनाए और इसी दशम भाव में मंगल भी स्थित हो तो व्यक्ति समाज के लोगों के हितों के लिए राजनीति में आता है। यहां शनि जनता का हितैषी है और मंगल व्यक्ति में नेतृत्व का गुण दे रहा है। दोनों का संबंध व्यक्ति को राजनेता बनने के गुण प्रदान करेगा। सूर्य और राहु के अमात्यकारक बनने से व्यक्ति रुचि होने पर राजनीति के क्षेत्र में सफलता पाने की संभावना रखता है और समाज में मान-सम्मान तथा उच्च पद की प्राप्ति होती है। जन्मकुंडली, नवमांश तथा दशमांश तीनों कुंडलियों में समान तथा योग व्यक्ति को राजनीति में ऊंचाइयों पर ले जाते हैं।
 
यदि सूर्य स्व या उच्च राशि (सिंह, मेष) में होकर केंद्र, त्रिकोण आदि शुभ भावो में बैठा हो तो राजनीति में सफलता मिलती है।
सूर्य दशम भाव में हो या दशम भाव पर सूर्य की दृष्टि हो तो राजनीति में सफलता मिलती है।
सूर्य यदि मित्र राशि में शुभ भाव में हो और अन्य किसी प्रकार पीड़ित ना हो तो भी राजनैतिक सफलता मिलती है।
शनि यदि स्व, उच्च राशि (मकर , कुम्भ, तुला) में होकर केंद्र त्रिकोण आदि शुभ स्थानों में बैठा हो तो राजनीती में अच्छी सफलता मिलती है।
5.यदि चतुर्थेश चौथे भाव में बैठा हो या चतुर्थेश की चतुर्थ भाव पर दृष्टि हो तो ऐसे व्यक्ति को विशेष जनसमर्थन मिलता है।
चतुर्थेश का स्व या उच्च राशि में होकर शुभ स्थानं में होना भी राजनैतिक सफलता में सहायक होता  है।
बृहस्पति यदि बलि होकर लग्न में बैठा हो तो राजनैतिक सफलता दिलाता है।
दशमेश और चतुर्थेश का योग हो या दशमेश चतुर्थ भाव में और चतुर्थेश दशम भाव में हो तो ये भी राजनीती में सफलता दिलाता है  
सूर्य और बृहस्पति का योग केंद्र ,त्रिकोण में बना हो तो ये भी राजनैतिक सफलता दिलाता है।
बुध-आदित्य योग (सूर्य + बुध) यदि दशम भाव में बने और पाप प्रभाव से मुक्त हो तो राजनैतिक सफलता दिलाता है।
विशेष – कुंडली में सूर्य , शनि और चतुर्थ भाव बलि होने के बाद व्यक्ति को राजनीति में किस स्तर तक सफलता मिलेगी यह उसकी पूरी कुंडली की शक्ति और अन्य ग्रह स्थितियों पर निर्भर करता है।
 
जिन लोगो की कुंडली में सूर्य नीच राशि (तुला) में हो राहु से पीड़ित हो अष्टम भाव में हो या अन्य प्रकार पीड़ित हो तो राजनीति में सफलता नहीं मिल पाती या बहुत संघर्ष बना रहता है। शनि पीड़ित या कमजोर होने से ऐसा व्यक्ति चुनावी राजनीति में सफल नहीं हो पाता, कमजोर शनि वाले व्यक्ति की कुंडली में अगर सूर्य बलि हो तो संगठन में रहकर सफलता मिलती है।
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जानिए जन्म लग्न से राजनीति के योग---
 
मेष लग्न- प्रथम भाव में सूर्य, दशम में मंगल व शनि हो तथा दूसरे भाव में राहु हो तो जनता का हितैषी राजनेता बनेगा।
 
वृष लग्न- दशम भाव का राहु व्यक्ति को राजनीति में प्रवेश दिलाता है। राहु के साथ शुक्र भी हो तो राजनीति में प्रखरता आती है।
 
मिथुन लग्न- शनि नवम में तथा सूर्य, बुध लाभ भाव में हो तो व्यक्ति प्रसिद्धि पाता है। राहू सप्तम में तथा सूर्य 4, 7 या 10वें भाव में हो तो प्रखर व्यक्तित्व तथा विरोधियों में धाक जमाने वाला राजनेता बनता है।
 
कर्क लग्न-शनि लग्न में, दशमेश मंगल दूसरे भाव में, राहू छठे भाव में तथा सूर्य बुध पंचम या ग्यारहवें भाव में चंद्रमा से दृष्ट हो तो व्यक्ति राजनीति में यश पाता है।
 
सिंह लग्न-सूर्य, चंद्र, बुध व गुरु धन भाव में हों, मंगल छठे भाव में, राहु बारहवें भाव में तथा शनि ग्यारहवें घर में हो तो व्यक्ति को राजनीति विरासत में मिलती है। यह योग व्यक्ति को लम्बे समय तक शासन में रखता है, इस दौरान उसे लोकप्रियता व वैभव प्राप्त होता है।
 
कन्या लग्न- दशम भाव में बुध का संबंध सूर्य से हो, राहु, गुरु, शनि लग्न में हो तो व्यक्ति राजनीति में रूचि लेगा।
 
तुला लग्न- चंद्र, शनि चतुर्थ भाव में हो तो व्यक्ति वाकपटु होता है। सूर्य सप्तम में, गुरू आठवें, शनि नौवें तथा मंगल बुध ग्यारहवें भाव में हो तो राजनीति में अपार सफलता पाता है तथा प्रमुख सलाहकार बनता है।
 
वृश्चिक लग्न-लग्नेश मंगल बारहवें भाव में गुरू से दृष्ट हो, शनि लाभ भाव में हो, चंद्र-राहु चौथे भाव में हो, शुक्र सप्तम में तथा सूर्य ग्यारहवें घर के स्वामी के साथ शुभ भाव में हो तो व्यक्ति प्रखर नेता बनता है।
 
धनु लग्न-चतुर्थ भाव में सूर्य, बुध, शुक्र हों तथा दशम भाव में कर्क का मंगल हो तो तकनीकी सोच के साथ राजनीति करता है।
 
मकर लग्न- राहु चौथे भाव में हो तथा नीचगत बुध उच्चगत शुक्र के साथ तीसरे भाव में हो तो नीचभंग राजयोग से व्यक्ति राजनीति में दक्ष तथा चतुर होता है।
 
कुंभ लग्न- लग्न में सूर्य शुक्र हो तथा दशम में राहू हो तो राहू तथा गुरू की दशा में राजनीति में सफलता मिलती है। गुरू की दशा में प्रबल सफलता मिलती है।
 
मीन लग्न-चंद्र, शनि लग्न में, मंगल ग्यारहवें तथा शुक्र छठे भाव में हो तो शुक्र की दशा में राजनीतिक लाभ तथा श्रेष्ठ धन लाभ होता है।
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जानिए राजनीति कारक ग्रहों को--
 
ज्योतिषाचार्य पंडित दयानन्द शास्त्री ने बताया की एक सफल राजनेता बनने के लिए वैसे तो समस्त नौ ग्रहों का बली होना आवश्यक है किंतु फिर भी सूर्य, मंगल, गुरु और राहु में चार ग्रह मुख्य रूप से राजनीति में सफलता प्रदान करने में सशक्त भूमिका निभाते हैं। साथ ही चंद्रमा का शुभ व पक्ष बली होना भी अति आवश्यक है। सूर्य ग्रह तो है ही सरकारी राजकाज में सफलता का कारक, मंगल से नेतृत्व और पराक्रम की प्राप्ति होती है। गुरु पारदर्शी निर्णय क्षमता एवं विवेक शक्ति प्रदान करता है तथा राहु को ज्योतिष में शक्ति, हिम्मत, शौर्य, पराक्रम, छल कपट और राजनीति का कारक माना गया है। 
 
अतः कुंडली में यदि ये चारों ग्रह बलवान एवं शुभ स्थिति में होंगे तो ये एक सशक्त, प्रभावी, कर्मठ, जुझारु एवं प्रतिभाशाली व्यक्तित्व की नींव पर एक पूर्णतया सरल एवं सशक्त राजनेता रूपी इमारत का निर्माण करेंगे जिस पर राष्ट्र सदैव गौरवान्वित रहेगा। राजनीति में संबंधित भाव: ज्योतिषीय दृष्टि से राजनीति से संबंधित भाव मुख्यतया- लग्न, तृतीय, चतुर्थ, पंचम, षष्ठ, नवम्, दशम एवं एकादश हैं। लग्न व्यक्ति और व्यक्तित्व है, लग्नेश प्राप्तकर् है। तृतीय भाव सेना, चतुर्थ भाव जनता, पंचम भाव राजसी ठाटबाट एवं मंत्री पद की भोग्यता, षष्ठ भाव युद्ध एवं कर्म, नव भाव भाग्य, दशम् भाव कार्य, व्यवसाय, राजनीति और एकादश लाभ भाव है। दृढ़ व्यक्तित्व, जनमत संग्रह, पराक्रम, जनता का पूर्ण समर्थन, सफलता, धन और मंत्री पद की योग्यता। ये सभी गुण एक राजनेता बनने के लिए परमावश्यक तत्व हैं। 
 
साथ ही जब इन भावेशों का संबंध लाभ भाव से बनेगा तो ऐसे विशिष्ट ग्रहयोगों से युक्त कुंडली वाला जातक ‘‘एक सफल राजनेता’’ बनेगा। इसमें लेशमात्र भी संदेह नहीं है। राजनीति क्षेत्र के योग: - सूर्य एवं राहु बली होने चाहिए। - दशमेश स्वगृही हो अथवा लग्न या चतुर्थ भाव में बली होकर स्थित हो। - दशम भाव में पंचमहापुरुष योग हो एवं लग्नेश भाग्य स्थान में बली हो तथा सूर्य का भी दशम भाव पर प्रभाव हो। 
 
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उपाय – राजनीती से जुड़े या राजनीती में जाने की इच्छा रखने वाले लोगों को सूर्य उपासना अवश्य करनी चाहिये –
 
=====पहला उपाय : आप सुबह जल्दी उठकर नहा धो लें और पूजा घर में पहले अपने इष्ट देव को याद करें. फिर आप निम्नलिखित मंत्र का 108 बार जाप करें.फिर आप निम्नलिखित मंत्र का 108 बार जाप करें.
 
देहि सौभाग्यमारोग्यं देहि में परम सुखं,
धनं देहि, रूपं देहि, यशो देहि, द्विषो जही |
 
इस मंत्र का जाप आपको रोजाना 108 बार करना है. ये उपाय आपकी कुंडली के नौवें और दसवें भाव वाले ग्रहों की स्थिति को मजबूत करता है और आपके दुर्भाग्य को सौभाग्य में बदलकर आपको राजनीति में सफल बनाता है.
 
===दुसरा उपाय : एक प्रसिद्ध और सफल राजनेता बनने के लिए आपको 21 शुक्रवार तक माता दुर्गा का व्रत रखना है और 21वें शुक्रवार के दिन आप एक लाल कपड़ा लें और उसमें 42 लौंग, 21 लाल रंग की चूड़ियाँ, 7 कपूर, 5 गुडहल के फुल, 2 चांदी की बिछियाँ, सिंदूर और परफ्यूम रख कर देवी माता के चरणों में अर्पित करें. इस उपाय को मनवांछित राजनितिक सफलता पाने का सबसे सफल उपाय है.
 
=====तीसरा उपाय : आप थोड़ा सा कुमकुम, लाख, कपूर, घी, मिश्री और शहद को मिलाकर एक गाढा पेस्ट तैयार करें. फिर इस पेस्ट से आप पहले माता दुर्गा और फिर खुद को तिलक लगायें. आप इस उपाय को 5, 7 और 11 दिनों तक लगातार अपनाएँ, आपको राजनीति में सफलता अवश्य मिलेगी.
 
====चौथा उपाय : चौथे उपाय के लिए आप थोड़ी सी मिटटी में पानी व शुद्ध देशी घी मिलाकर 9 गोलियाँ तैयार करें व उन्हें छाया में सूखने के लिए छोड़ दें. जब ये गोलियाँ सुख जाएँ तो इन्हें 9 दिनों तक पीले सिंदूर की डिब्बी में रखें व 9वें दिन ही इन्हें किसी बहते पानी में प्रवाहित कर दें. लेकिन ध्यान रहे कि आपको सिंदूर को प्रवाहित नहीं करना है बल्कि उसे आप संभाल कर रखें और जब भी आप घर से बाहर काम के लिए निकलें तो आप इस सिंदूर का टिका लगाकर ही निकलें. ये उपाय पहले आपको प्रसिद्धि दिलाता है और फिर धीरे धीरे एक सफल नेता.
 
====पांचवा उपाय : रविवार का दिन सूर्यदेव का होता है जो आपको ज्ञान, बल और समाज में मान सम्मान दिलाते है. तो आप रविवार के दिन पहले सूर्य देव की पूजा करें और फिर उनसे जुडी चीजों जैसेकि लड्डू, ताम्बे के बर्तन, गेहूँ, गुड, माणिक्य, लाल या फिर पीला कपड़ा और लाल चन्दन का दान करें. इससे सूर्य देव प्रसन्न होते है और आपको आपके हर क्षेत्र में सदा सफल होने का आशीर्वाद देते है.
 
====आदित्य हृदय स्तोत्र का रोज पाठ करें।
====सूर्य को रोज जल अर्पित करें।
===ॐ घृणि सूर्याय नमः का जाप करें।
 
प्रिय पाठकों/मित्रों, ये है कुछ अचूक और असरदार उपाय जिन्हें अपनाकर आप अपनी कुंडली में राजयोग को बना सकते हो और राजनीति में सफलता प्राप्त कर सकते हैं |